नागदा को जिला बनाने कि प्रक्रिया अंतिम व निर्णायक मोड़ पर, राज्य शासन जारी कि दावे आपत्ती कि अधिसूचना।



नागदा
नागदा को जिला बनाने की प्रक्रिया अब अंतिम व निर्णायक मोड़ पर आ चुकि है। बरसों से नागदा को जिला बनाने की मांग कर रहे क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकताओं की मेहनत के फलस्वरूप 28 जुलाई को राज्य शासन के राजस्व विभाग ने नागदा को जिला बनाये जाने के संदर्भ में दावे आपत्ती कि अधिसूचना जारी कर दी निश्चित ही यह जिले की कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस अधिसूचना कि जानकारी लगने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। पहले कांग्रेस विधायक के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने एक जूलूस निकाला तो कावड़ यात्रा समाप्त कर नागदा लौटते ही भाजपा मंडल के नेतृत्व में पूर्व विधायक सहीत भाजपाईयों ने भी शहर के मुख्य मार्गों पर जूलूस निकाल कर जश्न मनाया।

न्यूज़ रिसर्च

दावे आपत्ती कि अधिसूचना जारी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया जिससे शहर में यह संदेश तेजी से फैल गया की नागदा जिला बन गया। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। निश्चित ही नागदा को जिला बनाने की एक महत्वपूर्ण कार्यवाही को आगे बढाते हुए राज्य शासन ने दावे आपत्ती आमंत्रित किये हैं मगर जिला बनने का सफर अभी पूरा तय नहीं हुआ है।

कैसे होती है दावे आपत्ती कि प्रक्रिया जानिये हमारे एक्सपर्ट अभय चैपडा से

भू राजस्व संहीता 1959 कि धारा 13 के अंतर्गत जिला और तहसील बनाये जाने का प्रावधान है इससे संबंधित दावे आपत्ती आमंत्रित की जाती है 28 जुलाई को राज्य शासन के राजस्व विभाग ने दावे आपत्ती आमंत्रित किये हैं इसकी समय सीमा अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिवस तक की होगी यानी 28 अगस्त तक दावे आपत्ती आमंत्रित होंगे। जिन तहसीलों को मिला कर नागदा को जिला बनाया जाना है वे हैं रतलाम जिले की ताल और आलोट व उज्जैन जिले की खाचरौद व नागदा तहसील अब इन तहसील के लोगों को किसी भी प्रकार की आपत्ती होगी तो उन्हें 30 दिन के भीतर लिखीत आपत्ती दर्ज करवाना होगी।

कहां दर्ज होगी आपत्ती ?

यदि किसी को दावे या आपत्ती दर्ज करवाना हो तो उसके लिये तय समय सीमा में भोपाल के राजस्व विभाग में जिला बनाओ विभाग के नाम से कार्यालय है वहां पर लिखित रूप से आपत्ती दर्ज करवायी जा सकेगी। इसके बाद बारी आयेगी दावे आपत्तीयों के निराकरण कि जिसमें कम से कम 60 दिवस यानी की 2 महीनों का वक्त लग सकता है।
इसके बाद यदि शासन किसी आपत्तीकर्ता की आपत्ती को खारीज कर देता है और उक्त आपत्तीकर्ता की आपत्ती तर्कसंगत होगी तो वह आपत्तीकर्ता हाईकोर्ट की शरण में जा सकता है ऐसे में यदि न्यायालय दावा एक्सेप्ट कर लेता है तो जिले की बची हुई प्रक्रिया पर स्टे लग जाएगा और प्रक्रिया वहीं थम जाएगी फिर कोर्ट के निर्णय के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ सकेगी।
वहीं इसके विपरित यदि सब कुछ ठिक रहा और कोई ठोस आपत्तीयां नहीं आयी तो दावे आपत्ती के 30 दिनों व निराकरण के 60 दिनों के बाद नागदा जिला बन जाएगा फिर अंतिम रूप देने के लिये केबिनेट की मिटिंग में नये कलेक्टर और एसपी के पदस्थापना उनके कार्यालय भवन पर मौहर लग जाएगी।  

कांग्रेस ने मनाया जश्न तो भाजपा ने कसा तंज

दावे आपत्ती की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक दिलीप सिंह गुर्जर इतने ज़्यादा उत्साहित हो गये की उन्होंने एक जुलुस नगर में निकाल दिया इस पर भाजपा नेता व पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत ने पलटवार करते हुए कहा कि विधायक को पता ही नहीं है अभी गजट नोटिफिकेशन नहीं बल्की अधिसूचना जारी हुई है और विधायक गुर्जर भाजपा के द्वारा किये जा रहे कार्य का जश्न मना रहे हैं। खुद विधायक ने मुख्यमंत्री की घोषणा का मज़ाक बनाया था और आज मुख्यमंत्री के काम का ही जश्न मना रहे हैं शेखावत ने कहा की विधायक गुर्जर से बडा कोई झूठा नेता इस विधानसभा में नहीं है पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत ने कहा की जिले की प्रक्रिया भाजपा की मेहनत का फल है और संभवतः चुनाव से पहले नागदा को जिला बना देंगे।

अधिसूचना जारी होने के बाद कांग्रेस ने जश्न मनाते हुए इस प्रक्रिया श्रेय लेने का प्रयास किया जिस पर भाजपा ने पलटवार किया है मिडिया से बात करते हुए भाजपा मंडल अध्यक्ष सीएम अतुल ने कहा की जिस विधायक दिलीप सिंह गुर्जर को खुद कांग्रेस गंभीरता से नहीं लेती उनकी भाजपा कैसे सुन लेती गौरतलब है कि कांग्रेस कि चुनाव समिति का गठन हुआ है उसमें 34 कांग्रेस के नेता शामिल किये गए हैं कुछ तो कांग्रेस विधायक से भी जूनियर हैं लेकिन 4 बार के विधायक को उनकी खुद की पार्टी भी सिरियसली नहीं लेती तो भाजपा तो दूर की बात है। जिला तो भाजपा कि सरकार ही बनाएगी

पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत और मंडल अध्यक्ष सीएम अतुल ने मिडिया से की चर्चा देखिये पूरा विडियो।


 विधायक दिलीप गुर्जर से प्रतिक्रिया लेना चाही मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया।